‘रेड-रॉट’ बीमारी से पूर्वांचल में 25 फीसद गन्ना सूखा,चीनी मिलों के चलने तक इसके 40 फीसद पहुंचने की संभावना

Red-rot disease on sugarcane

गोरखपुर, 21 सितम्बर (हि.स.)। गन्ना किसानों को संजीवनी बन आर्थिक ताकत देने वाली गन्ना की प्रजाति (को. 238 रोग ग्रस्त हो गयी है। यह ‘गन्ना का कैंसर’ कही जाने वाली बीमारी ‘रेड रॉट ‘ का शिकार हो गयी है।

पूर्वांचल के तकरीबन सभी जिलों में इसका प्रकोप हो गया है। चीनी मिलों में पेराई शुरू होने तक कुल बुवाई के रकबा के 40 फीसद तक सूखने के अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि अब तक 25 फीसद रकबा में बोए गए गन्ने की फसल के सूखने का अनुमान लगाया जा चुका है।

95 फीसद तक बोई गई है एक ही प्रजाति

मंडल में तकरीबन सभी जिलों में गन्ना प्रजाति को. 238 की काफी बुवाई हुई है। कई चीनी मिल क्षेत्रों में इसका रकबा 80-95 फीसद तक पहुंच गया है। गन्ना पड़ताल (सर्वे) के आंकड़ों पर गौर करने पर पता चलता है कि कुशीनगर ज़िले के खड्डा चीनी मिल परिक्षेत्र में इसकी बुवाई 75 से 80 फीसद पहुंच गई है। हाटा स्थित चीनी मिल ने किसानों को जागरूक कर इसकी बुवाई का रकबा 90 फीसद पहुंचा लिया है। इतना ही नहीं, गन्ना समिति की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक रामकोला स्थित त्रिवेणी चीनी मिल में 95 फीसद तक पहुंच गई है।

किसानों की नगदीचीनी उत्पादन होगा प्रभावित

‘रेड रॉड’ से गन्ना किसानों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। इनकी नगदी आमदनी पर चोट लगने की संभावना है। चीनी उत्पादन भी बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। गन्ना समितियों द्वारा किये सर्वे अनुमान के मुताबिक अब तक 20 से 25 फीसद रकबा की फसल ‘रेड रॉड’ की चपेट में है। इसके बढ़ने का क्रम जारी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि चीनी मिल में पेराई होने के वक्त तक यह रकबा बढ़कर 35 से 40 फीसद तक पहुंच सकती है।

बोले वैज्ञानिक

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आदित्य प्रकाश द्विवेदी का कहना है गन्ना में होने वाली ‘रेड रॉड’ बीमारी लाइलाज है। यह गन्ना का कैंसर है। ऐसा कोई केमिकल या दवा नहीं है, जिससे इसका इलाज हो। यह एक बार फसल में हो जाता है तो पूरी तरह नष्ट कर देता है।

बोले सहायक निदेशक

गन्ना विकास संस्थान एवं किसान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के सहायक निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता का कहना है कि गन्ना प्रजाति के रोगग्रस्त होने की जानकारी हमें है। हम सर्वे रिपोर्ट पर नजर गड़ाए हुए हैं। एक प्रजाति की अधिक बुवाई किसान और चीनी मिल दोनों के लिए घाटे का सौदा है। बीमारी ग्रस्त होने से चीनी मिल परिक्षेत्र के न सिर्फ किसान घाटे में जाते हैं, बल्कि प्रोडक्शन भी कम मिलता है। वर्तमान में रोगग्रस्त प्रजाति को. 238 से होने वाला नुकसान किसानों और चीनी मिल दोनों की गलती का दुष्परिणाम है। गन्ना विकास विभाग लगातार इसके लिए जागरूक करता रहा है कि एक ही प्रजाति का रकबा न बढ़ाया जाय, लेकिन दोनों ने इसे अनसुना किया।

यह है औसत उपज

– गोरखपुर जिला में गन्ना की औसत उपज 650 कुंतल प्रति हेक्टेयर

– महराजगंज जिले में इसे 658 कुंतल प्रति हेक्टेयर

– देवरिया में यह 646 कुंतल प्रति हेक्टेयर

– कुशीनगर जिले में गन्ने की औसत उपज 735 कुंतल प्रति हेक्टेयर

(आंकड़े वर्ष 2018-19 के) 

यह है वर्तमान बुवाई रकबा

– कुशीनगर में 01 लाख 01 हजार हेक्टेयर 

– महराजगंज में 17 हजार हेक्टेयर 

– देवरिया में 11 हजार हेक्टेयर

– गोरखपुर में 4200 हेक्टेयर

(वर्ष 2019-20 के आंकड़े)

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