योगी सरकार के नाम पर उत्तर प्रदेश में कांपने लगा संगठित अपराध

लखनऊ, 28 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में संगठित रूप से अपराध करने वाले गिरोह की संख्या आज भी एक दर्जन से ऊपर है। इसमें छह गिरोहों की कमर पूरी तरह से टूट चुकी है और शेष योगी सरकार के नाम से कांपने लगे हैं। संगठित अपराध करने वाले अपराधी या तो प्रदेश के बाहर चले गए हैं या फिर अपनी जमानतें खारिज करवाकर जेल में बंद हैं।

प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद से शुरू हुआ एकांउटर का दौर अब फिर तब वापस आया है, जब प्रदेश के कोने-कोने में छोटे अपराधियों ने अपने गिरोह बनाकर बड़े गिरोह के संरक्षण में काम करना शुरू कर दिया। योगी सरकार ने जब छोटे गिरोह के सरगनाओं को सूचीबद्ध कराना शुरू किया तो वे अपने जिले से निकलकर दूसरे जिलों में जा छिपे, जो उनके लिए महंगा पड़ गया। गैरजनपदों की पुलिस ने शातिर अपराधियों के जिले में होने की सूचना मिलते ही उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की और विभिन्न मुठभेड़ में घायल हुए अपराधियों को पकड़ लिया। इसी बीच कई अपराधी पुलिस पर हमला करने और जवाबी फायरिंग में मार गिराये गये। 

बड़े ​संगठित गिरोहों में राठी गैंग, दोजाना गैंग, सलीम शोहराब गैंग के कई शूटरों को यूपी पुलिस ने मार गिराया। इसके बाद से इनकी गतिविधियों में बेहद कमी आई और हत्या, अवैध वसूली जैसी घटनाएं कम हो गईं। लखनऊ, मेरठ, गाजियाबाद और अलीगढ़ में बंद इन गैंगों के शूटर अब जेल से बाहर आना नहीं चाहते और अंदर रहकर ही छोटे गिरोहों की मदद से अपनी गतिविधि चलाना चाहते हैं। इसी तरह से गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ की जेलों में बंद पुराने अपराधी भी बाहर आना नहीं चाहते। वे अपने गैंग के सरगना के कहने पर जेल के भीतर से ही गतिविधि जारी रखना चाहते हैं।  

प्रदेश की केन्द्रीय व जिला कारागारों में बंद बड़े माफिया में अब कुछ ‘माननीय’ भी हो चुके हैं जो राजनीतिक शरण मिलने से अपने पुराने कार्यों से दूरी बनाकर चलना चाहते हैं। दूसरी तरफ वर्तमान सरकार की नीतियों को पसंद न करने वाले माफिया या उनके गुर्गों के लिए एक पूर्व मंत्री और एक क्षेत्रीय पार्टी के अध्यक्ष पैरोकार हो गए हैं। पूर्व मंत्री उनकी सुख-सुविधाओं के लिए वर्तमान प्रदेश सरकार के मुखिया से पैरवी करते दिख रहे हैं। खनन, कंट्रक्शन और शराब के क्षेत्र में पांव फैलाये माफिया पर भी योगी सरकार ने पूरी तरह से लगाम कस दी है। इस कारण इन क्षेत्रों से जुड़े माफिया राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो गए हैं और ज्यादातर योगी सरकार के विधायकों, सांसदों के सम्पर्क में हैं। इसी वजह से इस समय बालू, गिट्टी, छड़, सीमेंट के मूल्य पूरी तरह से कंट्रोल में हैं। 

जेलों से वायरल हुए फोटो वीडियो 

प्रदेश की जेलों से अपराधियों के फोटो और वीडियो बाहर आने का सिलसिला अभी भी थमा नहीं है। कोई गन लेकर फोटो खिंचवाता है तो कोई केक काटते हुए। कुछ अपराधी एक साथ खाते-पीते हुए जेल में दिखते हैं। ऐसी फोटो और वीडियो के जेल से बाहर आने के बाद योगी सरकार ने जेल के अधिकारियों को बदल दिया। प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून व व्यवस्था रहे आनन्द कुमार को जेल का महानिदेशक बना दिया गया जिससे पूरी तरह से प्रदेश की जेलों पर कंट्रोल रह सके। 

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